इंदौर. ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण का शिकार हुए पुलिस विभाग के 62 वर्षीय सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) भगवती शरण शर्मा शनिवार को कोरोना से जंग जीतकर चोइथराम अस्पताल से बाहर आए तो दंग रह गए। उनके स्वागत के लिए खुद डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र, एसपी हेड क्वार्टर सूरज वर्मा, 15वीं बटालियन कमांडेंट ओपी त्रिपाठी व पूरे पश्चिम क्षेत्र के पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। अस्पताल के गेट पर एएसआई शर्मा के स्वागत के लिए पुलिस बैंड तैयार था। खुली जिप्सी सवार कर अधिकारियों ने उन्हें सम्मानपूर्वक घर तक छोड़ा। घर पर भी जिप्सी से उतरकर रेड कारपेट पर चलकर उन्हें भीतर भिजवाया गया। इधर, अस्पताल से निकलने के बाद जुलूस के रूप में उनका हर चौराहे पर स्वागत हुआ। उनकी खुली जिप्सी के आगे पुलिस बैंड ग्रुप सुमधुर ध्वनि के साथ घर तक उन्हें साथ ले गया। इस दौरान रास्तेभर जवानों ने फूलों की वर्षा की।
एक एएसआई रैंक के अधिकारी होने के बाद इतना सम्मान पाकर वे न केवल खुश हुए बल्कि उन्होंने कहा कि 42 साल की नौकरी में यह सम्मान उनके लिए यादगार बना है। उन्होंने बताया कि वे जंजीर वाला चौराहे पर पंजाब नेशनल बैंक में गार्ड ड्यूटी पर थे। इसी दौरान वे संक्रमण की चपेट में आए। 26 अप्रैल को उन्हें कोरोना संक्रमण से पॉजिटिव आने के बाद चोइथराम अस्पताल में भर्ती किया गया था। डीआईजी मिश्र ने बताया कि 62 साल की उम्र में डायबिटिक होने के बाद वे कोरोना को हराकर लौटे हैं। इसलिए उन्हें सम्मान पूर्वक उनके घर तक पहुंचाया है। आरआई जय सिंह तोमर ने जवानों में हौसला देने के लिए ये कॉन्सेप्ट उनके लिए तैयार करवाया था। एसपी सूरज वर्मा ने कहा कि विभाग एक 42 वर्षीय टीआई को खो चुका है, लेकिन एएसआई शर्मा ने 62 वर्ष की उम्र में कोरोना को मात दी है। इससे पूरे विभाग में जवानों को हौंसला मिला है। वे इस सम्मान के हकदार हैं।
चौराहों पर हुई पुष्प वर्षा
एएसआई शर्मा को चोइथराम अस्पताल से बैंड बाजे के साथ पुलिस की टीम खुली जिप्सी में मल्हारगंज (छिपा बाखल) स्थित घर तक ले गई। यहां जिप्सी से उतरते ही उन्हें रेड कारपेट बिझाकर घर वालों तक छोड़ा। इस दौरान जहां-जहां से काफिला गुजरा वहां चौराहों पर ड्यूटी कर रहे जवानों ने उन पर पुष्प वर्षा की। एएसआई शर्मा की पत्नी व बेटा यह सम्मान देख भावुक हो गए।
संघर्ष करो नैय्या पार हो जाएगी
एएसआई भगवती शरण शर्मा ने सम्मान के लिए विभाग के सभी अफसर कर्मचारी का धन्यवाद किया। उन्होंने अपनी फोर्स के जवानों के लिए संदेश दिया कि कोरोना से डरे नहीं। आप में संंघर्ष करने की हिम्मत है तो आपकी नैय्या पार हो जाएगी। मैं इससे घबराया नहीं, उपचार के दौरान पूरा संघर्ष कर उसे मात दी। अफसरों ने समय-समय पर मेरे स्वास्थ्य की चिंता की। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।